धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली का प्रबंधन किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना रहता है। कई बार अगली फसल की बुवाई समय पर करने के लिए किसान पराली जलाने का सहारा लेते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
इस समस्या के समाधान और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी नई कृषि मशीन मैक्ससीडर का वाणिज्यिक उत्पादन और आपूर्ति शुरू कर दी है। यह आधुनिक मशीन धान की पराली को हटाए या जलाए बिना खेत में सीधे अगली फसल की बुवाई करने में मदद करेगी।
मैक्ससीडर को प्रिसीजन जीरो-टिल मल्टी-क्रॉप सीडिंग तकनीक पर विकसित किया गया है। इसके निर्माण के लिए कनाडा की क्लीन सीड टेक्नोलॉजीज की तकनीक का लाइसेंस लिया गया है। मशीन का उद्देश्य किसानों को ऐसी बुवाई सुविधा उपलब्ध कराना है, जिससे खेत की तैयारी में लगने वाला समय, ईंधन और श्रम कम किया जा सके। इसके माध्यम से किसान पराली प्रबंधन और आधुनिक कृषि मशीनीकरण, दोनों दिशाओं में बेहतर विकल्प अपना सकते हैं।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस ने 12 अक्टूबर 2026 को मैक्ससीडर के वाणिज्यिक उत्पादन और आपूर्ति शुरू करने की घोषणा की। इस मशीन का निर्माण मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित कंपनी के विशेष कृषि मशीनरी संयंत्र में किया जा रहा है। कंपनी की योजना है कि चरणबद्ध तरीके से अपने डीलरशिप नेटवर्क के माध्यम से इसे किसानों तक पहुंचाया जाए।
शुरुआती चरण में मशीन की उपलब्धता पंजाब और हरियाणा में सुनिश्चित की जाएगी। इन दोनों राज्यों में धान की कटाई के बाद पराली प्रबंधन और गेहूं की समय पर बुवाई की आवश्यकता महत्वपूर्ण है। आगे चलकर किसानों की मांग और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार इसका विस्तार देश के अन्य हिस्सों में भी किया जाएगा।
महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष विजय नकड़ा के अनुसार, क्लीन सीड टेक्नोलॉजीज की उन्नत बुवाई तकनीक और महिंद्रा की विनिर्माण क्षमता का संयोजन किसानों को आधुनिक तथा टिकाऊ कृषि समाधान उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
मैक्ससीडर की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी जीरो-टिल तकनीक है। पारंपरिक खेती में अगली फसल की बुवाई से पहले खेत की जुताई और जमीन तैयार करने के लिए कई बार ट्रैक्टर चलाना पड़ता है। इससे डीजल, समय और मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च होता है। नई मशीन इस प्रक्रिया को कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
इसके इस्तेमाल से किसान धान की कटाई के बाद खेत में मौजूद फसल अवशेषों के बीच सीधे बीज बो सकते हैं। इससे पराली को पूरी तरह हटाने या जलाने की आवश्यकता कम हो सकती है। पंजाब और हरियाणा में किए गए फील्ड ट्रायल के दौरान मशीन ने धान के भारी अवशेषों के बीच प्रभावी बुवाई की क्षमता दिखाई। यह तरीका खेत में अनावश्यक छेड़छाड़ कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।
हालांकि, वास्तविक परिणाम खेत की स्थिति, मिट्टी की नमी, पराली की मात्रा और फसल प्रबंधन जैसे कारकों पर निर्भर करेंगे।
आधुनिक कृषि मशीनों की लागत में ट्रैक्टर की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अधिक हॉर्सपावर वाला ट्रैक्टर खरीदना छोटे और मध्यम किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए मैक्ससीडर को 35 एचपी या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाने के लिए तैयार किया गया है।
इससे उन किसानों को भी आधुनिक बुवाई तकनीक अपनाने का अवसर मिल सकता है, जिनके पास अपेक्षाकृत कम क्षमता वाला ट्रैक्टर है। मशीन में पांच स्वतंत्र बुवाई कतार इकाइयां दी गई हैं। जरूरत के अनुसार कतारों के बीच की दूरी को समायोजित किया जा सकता है, जिससे अलग-अलग फसलों की बुवाई के अनुरूप व्यवस्था बनाने में मदद मिलती है।
मैक्ससीडर को केवल गेहूं की बुवाई तक सीमित नहीं रखा गया है। यह अनाज, दलहन, सोयाबीन, मक्का और कपास सहित विभिन्न फसलों की बुवाई के लिए उपयोगी बनाई गई है। अलग-अलग फसलों के अनुरूप कतारों की दूरी और बुवाई की व्यवस्था को समायोजित करने की सुविधा इसकी उपयोगिता बढ़ाती है।
बहुउद्देशीय क्षमता के कारण किसान अपनी कृषि जरूरतों के अनुसार एक ही मशीन का इस्तेमाल अलग-अलग फसल प्रणालियों में कर सकते हैं। इससे कृषि उपकरणों के बेहतर उपयोग और खेती के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
मैक्ससीडर में इंटेलिजेंट इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट यानी ईसीयू दी गई है। यह खेत की जरूरत के अनुसार बीज, डीएपी और यूरिया की मात्रा नियंत्रित करने में मदद करती है। इसके अलावा, मशीन को ऑपरेटर के मोबाइल फोन पर उपलब्ध ऐप के माध्यम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। मशीन में लगी विशेष टाइन यूरिया को बीज की बुवाई वाली लाइन से लगभग 1.5 इंच नीचे डालती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरक को उचित स्थान पर पहुंचाना और उसके अनावश्यक इस्तेमाल को कम करना है। बीज तथा खाद की मात्रा पर बेहतर नियंत्रण से कृषि संसाधनों की बचत की संभावना बढ़ सकती है। इससे किसानों को बुवाई के दौरान इनपुट प्रबंधन अधिक सटीक तरीके से करने में सहायता मिलेगी।
मैक्ससीडर के इस्तेमाल से खेत की बार-बार तैयारी करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे ट्रैक्टर के संचालन, डीजल की खपत और मजदूरी पर होने वाला खर्च घटाने में मदद मिल सकती है। समय पर बुवाई होने से किसान फसल चक्र का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं और अगली फसल की तैयारी में होने वाली देरी को कम कर सकते हैं।
कंपनी के अनुसार, मशीन की तकनीक जल संरक्षण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में भी योगदान दे सकती है। क्लीन सीड कैपिटल ग्रुप के अध्यक्ष एवं सीईओ ग्रेम लेम्प्रियर ने भारत में मशीन का उत्पादन शुरू होने को टिकाऊ बुवाई तकनीक के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
महिंद्रा मैक्ससीडर किसानों को पराली प्रबंधन, बहुफसली बुवाई और कृषि लागत नियंत्रण के लिए एक नया विकल्प प्रदान करती है। इसकी वास्तविक उपयोगिता किसानों के खेतों में प्रदर्शन, मशीन की कीमत, उपलब्धता और रखरखाव लागत पर भी निर्भर करेगी। यदि यह तकनीक किसानों की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्रभावी साबित होती है, तो यह खेती को अधिक सुविधाजनक और संसाधन-कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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