भारत में खेती को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत कृषि मशीनीकरण उप-मिशन (SMAM) को बढ़ावा दे रही है। हाल ही में लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने इस योजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
इस योजना का उद्देश्य किसानों, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराना है। इससे खेती में लगने वाला समय और श्रम कम होगा, जबकि उत्पादन क्षमता और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।
SMAM योजना के तहत किसानों को कृषि उपकरण और मशीनरी खरीदने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। किसान मशीन की लागत का 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान प्राप्त कर सकते हैं।
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलता है, क्योंकि उनके लिए महंगे कृषि यंत्र खरीदना अक्सर मुश्किल होता है। सरकार ऐसे क्षेत्रों में भी मशीनीकरण को बढ़ावा दे रही है, जहां कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध नहीं है।
हर किसान के लिए ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनें खरीदना संभव नहीं होता। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित करने पर भी सहायता प्रदान कर रही है।
इस योजना के तहत 250 लाख रुपये तक की परियोजना लागत वाले कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जाती है। इससे किसान अपनी जरूरत के अनुसार मशीनें किराये पर लेकर खेती के कार्य आसानी से कर सकते हैं।
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए फार्म मशीनरी बैंक (FMB) की स्थापना को भी प्रोत्साहित कर रही है।
30 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 80 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों में यह सहायता 95 प्रतिशत तक हो सकती है। इससे कई किसान एक ही स्थान से आधुनिक कृषि मशीनों का लाभ उठा सकेंगे।
सरकार अब केवल पारंपरिक कृषि उपकरणों तक सीमित नहीं है। योजना के तहत कृषि ड्रोन, प्रिसिजन फार्मिंग उपकरण और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसके अलावा महिला किसानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए कृषि उपकरणों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, किसानों को मशीनों के उपयोग से संबंधित प्रशिक्षण, प्रदर्शन और क्षमता विकास की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना को भी अब SMAM के साथ जोड़ दिया गया है। इसका उद्देश्य पराली जलाने की समस्या को कम करना और फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
यह योजना पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर जैसे राज्यों में लागू की गई है। वर्ष 2023-24 से CRM योजना को RKVY के तहत SMAM में शामिल किया गया है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तीय भागीदारी तय की गई है।
केंद्र सरकार एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के माध्यम से बागवानी क्षेत्र में भी मशीनीकरण को प्रोत्साहित कर रही है।
इस योजना के तहत पौध संरक्षण उपकरण, बिजली से संचालित मशीनों और अन्य आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य बागवानी कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और किसानों की शारीरिक मेहनत को कम करना है।
किसान एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के माध्यम से भी कृषि मशीनरी से संबंधित परियोजनाओं के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
इसके तहत कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक जैसी परियोजनाओं के लिए ब्याज अनुदान, ऋण गारंटी और दीर्घकालिक वित्तपोषण की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के माध्यम से कृषि मशीनरी के क्षेत्र में लगातार अनुसंधान किया जा रहा है। देश के विभिन्न अनुसंधान संस्थान नई तकनीकों के विकास और उन्हें किसानों तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।
सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित हो रही तकनीकों की समीक्षा कर रही है और भारतीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी तकनीकों को अपनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
केंद्र सरकार ने कृषि मशीनरी निर्माण क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी है।
इस कदम से वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों को आधुनिक तकनीक वाली मशीनें भी आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
सरकार RKVY-RAFTAAR के माध्यम से कृषि मशीनरी और डिजिटल समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप को भी सहायता प्रदान कर रही है।
इन स्टार्टअप को इनक्यूबेशन, नवाचार कार्यक्रमों और वित्तीय सहायता के जरिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा, निजी क्षेत्र द्वारा संचालित मशीनरी किराया प्लेटफॉर्म और कस्टम हायरिंग सेंटर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
कृषि मशीनीकरण योजनाओं के माध्यम से किसानों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं, जैसे-
कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल खेती को अधिक आधुनिक, लाभदायक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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