बिहार के कृषि क्षेत्र को आधुनिक, आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पटना जिले के नौबतपुर में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम में किसानों के हित में कई बड़ी घोषणाएं कीं।
कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि खेती को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाना भी है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बिहार की कृषि व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि बिहार में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने ₹246 करोड़ की बड़ी राशि मंजूर की है।
इस राशि का उपयोग आधुनिक कृषि तकनीकों और मशीनों को किसानों तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है, कि खेती में मशीनों के उपयोग से समय और श्रम दोनों की बचत होगी तथा उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी।
कृषि यंत्रीकरण के जरिए किसानों की लागत कम होगी और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। वर्तमान समय में खेती को प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक माना जा रहा है, इसलिए यह पहल किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
स्वीकृत योजना के तहत बिहार में 267 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से किसान कम लागत पर आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग कर सकेंगे।
इसके अतिरिक्त किसानों को नई तकनीक से जोड़ने के लिए 480 कृषि ड्रोन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। ड्रोन तकनीक की सहायता से फसलों की निगरानी, कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव तथा खेतों का सर्वेक्षण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
इससे खेती की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों का समय भी बचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन आधारित कृषि तकनीक आने वाले वर्षों में खेती के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकती है और बिहार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सरकार ने कृषि अवशेष प्रबंधन और मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 200 कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इन केंद्रों के माध्यम से किसान किराए पर कृषि यंत्र प्राप्त कर सकेंगे। खास बात यह है कि सरकार आधुनिक कृषि उपकरणों पर 40 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान करेगी।
इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी महंगे कृषि यंत्र खरीदना आसान हो जाएगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सब्सिडी किसानों को आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही पराली प्रबंधन जैसी समस्याओं के समाधान में भी मदद मिलेगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में बिहार के किसानों की मेहनत और उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य आज लीची, मखाना और मशरूम उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि अब सरकार इन उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलने से किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। बिहार के कृषि उत्पादों की गुणवत्ता पहले से ही देश और विदेश में पहचान बना चुकी है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बेहतर विपणन और निर्यात के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएं।
बिहार के मखाना उत्पादकों के लिए केंद्र सरकार ने विशेष घोषणाएं की हैं। मखाना उत्पादन को संगठित और लाभकारी बनाने के लिए मखाना बोर्ड का गठन किया जाएगा।
इसके माध्यम से किसानों को बाजार, तकनीकी सहायता और उचित मूल्य उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा मखाना की खेती, प्रोसेसिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ₹476 करोड़ की विशेष योजना लागू की जाएगी।
यह योजना किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं प्रदान करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से बिहार का मखाना उद्योग नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा और किसानों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर प्राप्त होंगे।
फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ग्रामीण कृषि अवसंरचना को मजबूत बनाने जा रही है। इसके तहत बिहार में 304 भंडारण गोदाम, 800 पक्का थ्रेसिंग फ्लोर, 11 दाल मिल इकाइयां, 102 तेल प्रसंस्करण इकाइयां और 204 कोल्ड प्रेस तेल इकाइयों की स्थापना की जाएगी।
इन सुविधाओं से किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और वे बाजार में उचित समय पर बेहतर कीमत पर बिक्री कर सकेंगे। प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा, जिससे किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि संभव होगी। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
‘खेत बचाओ-जीवन बढ़ाओ’ अभियान के तहत केंद्रीय कृषि मंत्री ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है, इसलिए टिकाऊ खेती को अपनाना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में सरकार ने ₹65 करोड़ से अधिक की योजनाओं को मंजूरी दी है।
इन योजनाओं के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों की उत्पादन लागत कम होगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य को भी लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर कृषि यंत्रीकरण, आधुनिक अवसंरचना, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने वाली ये योजनाएं बिहार के कृषि क्षेत्र को आधुनिक, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगी।
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