भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन बीकानेर ने किसानों के लिए सहजन आधारित कृषि प्रणाली पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। नाबार्ड के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान के किसानों को कम पानी में बेहतर आय देने वाली सहजन की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 सहजन पौधे निःशुल्क दिए जाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार सहजन शुष्क और कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी फसल है। इसकी पत्तियां, फलियां, फूल और बीज सभी उपयोग में आते हैं। इसे पोषण से भरपूर होने के कारण सुपर फूड भी कहा जाता है। सहजन का इस्तेमाल मानव आहार, पशु चारा, औषधीय उत्पादों और विभिन्न उद्योगों में किया जाता है। इससे किसानों के लिए एक ही फसल से आय के कई रास्ते खुल सकते हैं।
CAZRI के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों के सामने खेती को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसे में सहजन पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि का बेहतर माध्यम बन सकता है। किसानों की बढ़ती रुचि को देखते हुए अगस्त में सहजन आधारित कृषि प्रणाली पर दो और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
प्रशिक्षण में किसानों को सहजन के मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण की जानकारी भी दी जा रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि सहजन की पत्तियों से पाउडर, फलियों से खाद्य सामग्री और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इन उत्पादों की बाजार में बढ़ती मांग किसानों को सामान्य खेती की तुलना में अतिरिक्त मुनाफा कमाने का अवसर दे सकती है।
परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बी.एल. बिश्नोई के अनुसार प्रशिक्षण के पहले चरण में बीकानेर जिले की अलग-अलग तहसीलों से करीब 30 किसान हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक किसान को 1,000 सहजन पौधे मुफ्त दिए जाएंगे। नाबार्ड की परियोजना के तहत जिले के 300 किसानों को 3 लाख से अधिक सहजन पौधे वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम में किसानों को केवल सहजन की खेती की तकनीक ही नहीं, बल्कि पौधरोपण, पौधों की देखभाल, पोषण प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी। मुफ्त पौधे मिलने से किसानों की शुरुआती लागत कम होगी। इससे वे कम लागत वाली टिकाऊ खेती अपनाने के साथ अतिरिक्त आय और पोषण सुरक्षा की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है, कि पारंपरिक फसलों के साथ सहजन की खेती को अपनाने से किसानों की आय के नए स्रोत विकसित हो सकते हैं। कम पानी और शुष्क जलवायु में इसकी उपयोगिता को देखते हुए यह मॉडल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मददगार हो सकता है। ICAR-CAZRI की यह पहल पश्चिमी राजस्थान के साथ देश के अन्य शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए भी टिकाऊ और लाभकारी कृषि का प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।
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