मेरठ कृषि मेले में दिखी खेती की नई तस्वीर, हजारों किसानों ने जानी आधुनिक तकनीक

By : tractorbird Published on : 07-Nov-2026
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मेरठ में कृषि मेले में उमड़े हजारों किसान, आधुनिक तकनीकों से कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की पहल

खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मेरठ स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। मेले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन और डिजिटल कृषि जैसी आधुनिक तकनीकों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है। इन तकनीकों के माध्यम से किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने और खेती को मुनाफे का व्यवसाय बनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। परंपरागत कृषि पद्धतियों को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक नवाचारों से जोड़ना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।

विज्ञान आधारित कृषि-खुशहाल किसान है मेले की थीम

तीन दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेले का आयोजन 'विज्ञान आधारित कृषि-खुशहाल किसान' विषय पर किया जा रहा है। इसमें देशभर से कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, कृषि उद्यमियों, कंपनियों और किसान उत्पादक संगठनों ने भाग लिया है। मेले में कुल 140 स्टाल लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र, कृषि आदान, जैविक खेती और नवीन अनुसंधानों की जानकारी दी जा रही है। आयोजन का मुख्य लक्ष्य किसानों को बदलते कृषि परिवेश के अनुरूप तैयार करना तथा उन्हें नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

140 स्टालों पर दिखी आधुनिक कृषि तकनीकों की झलक

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कृषि प्रदर्शनी में विभिन्न कंपनियों, संस्थानों और किसान उत्पादक संगठनों ने अपने उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनी में कृषि यंत्रों के नौ, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सात, सीएसआर कंपनियों के नौ, कृषि आदान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के 14 और किसान उत्पादक कंपनियों के 15 स्टाल लगाए गए हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय के 20 कृषि विज्ञान केंद्रों ने भी अपने स्टालों के माध्यम से किसानों को खेती से जुड़ी नई जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। यहां किसानों को आधुनिक मशीनों, उन्नत कृषि उपकरणों और वैज्ञानिक खेती की विधियों को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।

पहले दिन छह हजार से अधिक किसानों ने लिया हिस्सा

कृषि मेले के पहले दिन किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. सत्येंद्र खारी ने बताया कि पहले दिन छह हजार से अधिक किसानों ने मेले में प्रतिभाग किया। किसानों ने अलग-अलग स्टालों का भ्रमण कर आधुनिक कृषि उपकरणों, उन्नत बीजों, नई तकनीकों और खेती की लाभकारी पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। विश्वविद्यालय की ओर से छह लाख रुपये से अधिक की कृषि किट की बिक्री भी की गई। इससे मेले में किसानों की सक्रिय भागीदारी और आधुनिक कृषि संसाधनों के प्रति उनकी बढ़ती रुचि का पता चलता है।

कृषि चौपाल में फसल प्रबंधन और पशुपालन पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

मेले के दौरान कृषि विचार गोष्ठी और किसान चौपाल का भी आयोजन किया गया। इसमें कृषि वैज्ञानिकों ने रबी फसलों की उन्नत खेती, फसलों में लगने वाले रोगों का प्रबंधन, कीट नियंत्रण और फलोत्पादन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही पशुपालन, पशुओं के स्वास्थ्य और बेहतर पशु प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। किसानों ने अपनी खेती और पशुपालन से संबंधित समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रखीं। वैज्ञानिकों ने समस्याओं का समाधान बताते हुए किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने और समय के अनुसार कृषि प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।

फल-फूल, शाकभाजी और श्वान प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

कृषि मेले में तकनीकी प्रदर्शनी के साथ-साथ विभिन्न मनोरंजक और ज्ञानवर्धक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। श्वान प्रदर्शनी, फल-फूल और शाकभाजी प्रदर्शनी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से किसानों और आगंतुकों को फलोत्पादन, बागवानी, सब्जियों की उन्नत किस्मों तथा कृषि विविधीकरण की संभावनाओं से परिचित कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया और वहां प्रदर्शित कृषि तकनीकों एवं उत्पादों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कृषि अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाने और वैज्ञानिक नवाचारों को खेती से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया।

मंगलवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही करेंगे उद्घाटन

विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह 11 बजे प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मेले का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख सहित कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कृषि उत्पादन क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, किसानों की आय बढ़ाने, नई तकनीकों के प्रसार और कृषि विकास की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही मेले में मंडलीय रबी गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें किसानों को रबी सीजन की फसलों की बेहतर पैदावार और फसल प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी।

स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन और AI से खेती को मिलेगा नया आयाम

मेले में स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कृषि प्रणालियों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इन तकनीकों के जरिए खेतों में पानी की जरूरत का आकलन, फसलों की निगरानी, कीट एवं रोगों की पहचान और कृषि कार्यों को अधिक सटीक बनाने की संभावनाएं किसानों को समझाई जा रही हैं। डिजिटल तकनीक से खेती में संसाधनों की बचत और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं जैविक एवं प्राकृतिक खेती, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और पशुपालन जैसे क्षेत्रों की जानकारी भी किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। कुल मिलाकर मेरठ का यह कृषि मेला किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि उद्यमियों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है, जहां आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के माध्यम से खेती को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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