उत्तर प्रदेश सरकार ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने और निराश्रित गोवंशों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की है।
विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधान भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि 1 जून से 7 जून 2026 तक राज्यभर की गौशालाओं में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों को गौपालन से जोड़ना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके। इस अभियान के दौरान डेयरी क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिला दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत राज्य सरकार गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। योजना के अनुसार प्रति गोवंश प्रति माह 1,500 रुपये की सहायता दी जाती है।
यदि कोई किसान या पशुपालक चार निराश्रित गोवंशों को अपने संरक्षण में रखता है, तो उसे एक वर्ष में कुल 72,000 रुपये की सहायता प्राप्त होगी। यह राशि चार समान किस्तों में प्रदान की जाएगी।
सरकार का मानना है कि आर्थिक सहयोग मिलने से अधिक लोग गौपालन के लिए आगे आएंगे और निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा। यह योजना किसानों के लिए अतिरिक्त आय का भी एक प्रभावी माध्यम बन सकती है।
राज्य सरकार ने केवल आर्थिक सहायता तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि पशुओं के उचित रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की है। योजना से जुड़े लाभार्थियों को पशुशेड निर्माण की सुविधा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य किसानों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करना और उन्हें पशुपालन के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पशुशेड बनने से गोवंशों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिलेगा, जिससे उनके स्वास्थ्य और उत्पादकता में भी सुधार होगा।
1 जून से 7 जून तक चलने वाले विशेष अभियान के दौरान प्रदेश की सभी गौशालाओं में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पशुधन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गौशालाओं में विशेष सफाई अभियान चलाया जाए और गोवंशों के लिए भूसा, हरा चारा, साइलेज तथा स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही गौशालाओं के आसपास बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा ताकि पशुओं को बेहतर और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध हो सके। सरकार का मानना है कि स्वच्छ और हरित वातावरण पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा।
सरकार ने गोवंशों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए व्यापक टीकाकरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि माइक्रोप्लान तैयार कर प्रत्येक गोवंश का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
इससे विभिन्न संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी और पशुओं की उत्पादक क्षमता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त जिन जिलों में गौचर भूमि पर अवैध कब्जे हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर भूमि को मुक्त कराया जाएगा।
पर्याप्त चरागाह उपलब्ध होने से पशुओं को प्राकृतिक भोजन मिलेगा, जिससे उनका पोषण बेहतर होगा और संरक्षण कार्यों को भी मजबूती मिलेगी।
बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए दुग्ध उत्पादकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को उनके दूध का भुगतान बिना किसी देरी के किया जाए। साथ ही गांव-गांव में नई दुग्ध समितियों के गठन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पशुपालक डेयरी सहकारिता से जुड़ सकें।
इससे उन्हें अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिलेगा और विपणन संबंधी समस्याओं का समाधान भी होगा। अभियान को जनआंदोलन का रूप देने के लिए ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
भूसा संग्रहण अभियान की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। निर्धारित 1,37,42,018 क्विंटल लक्ष्य के मुकाबले 1,36,98,441 क्विंटल भूसा उपलब्ध कराया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 99.70 प्रतिशत है।
इसमें बड़ी मात्रा में भूसा दान और खरीद दोनों माध्यमों से प्राप्त किया गया है। इसके अलावा प्रदेश में हजारों अस्थायी और स्थायी भूसा बैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
सरकार का विश्वास है, कि विश्व दुग्ध दिवस सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रम किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन, संतुलित आहार प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य देखभाल और आधुनिक डेयरी तकनीकों की जानकारी देंगे। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी।
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