खेती में आधुनिक तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत विस्तार’ नामक एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के लॉन्च की घोषणा की। यह एक मल्टीलिंगुअल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल होगा, जिसे एग्रीस्टैक पोर्टल और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) द्वारा विकसित कृषि पद्धतियों के साथ जोड़ा जाएगा।
इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े संसाधनों तक आसान पहुंच देना और उन्हें अधिक सटीक, डेटा-आधारित फैसले लेने में सक्षम बनाना है। सरकार का मानना है कि इस तरह का AI इंटीग्रेशन खेती की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से बदल सकता है और किसानों के लिए जोखिम कम करते हुए उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
वित्त मंत्री के अनुसार, ‘भारत विस्तार’ प्लेटफॉर्म एडवांस्ड AI सिस्टम की मदद से किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक कस्टमाइज्ड सलाह देगा। यह सलाह फसल चयन, मौसम की स्थिति, बाजार के रुझान और खेती की वैज्ञानिक तकनीकों पर आधारित होगी।
एग्रीस्टैक पोर्टल को ICAR के प्रैक्टिस पैकेजों से जोड़कर यह प्लेटफॉर्म खेती की उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर योजना बनाने और अनिश्चितताओं से होने वाले नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान जमीन से जुड़े वास्तविक हालात के आधार पर सही निर्णय ले सकें और उनकी आय में स्थिरता आए।
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बताया कि भारत की लगभग 46.1 प्रतिशत कार्यबल आबादी खेती पर निर्भर है (PLFS 2023-24)। ऐसे में ‘भारत विस्तार’ जैसे डिजिटल टूल छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होंगे।
यह पहल सरकार के “विकसित भारत” के विजन के अनुरूप है, जहां सटीक खेती (Precision Agriculture) को बढ़ावा देकर किसानों को तकनीक से जोड़ा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि डिजिटल समाधानों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जाएगा
वित्त मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार ने किसानों और ग्रामीण नागरिकों तक सीधे लाभ पहुंचाने के लिए कई सुधार लागू किए हैं। इन सुधारों का मकसद कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना, कृषि उत्पादकता में इजाफा करना, किसान परिवारों की क्रय शक्ति को मजबूत करना और कृषि समुदायों को सार्वभौमिक सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इन प्रयासों का सकारात्मक असर यह रहा है कि कृषि क्षेत्र ने लगभग 7 प्रतिशत की मजबूत विकास दर दर्ज की है, जिससे ग्रामीण गरीबी कम करने और गांवों में जीवन स्तर सुधारने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
बजट में अधिक मूल्य देने वाली खेती (हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर) को प्रोत्साहित करने का भी स्पष्ट संकेत दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित करना, उत्पादकता बढ़ाना, आय में इजाफा करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
केंद्र सरकार नारियल, चंदन और अखरोट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को विशेष समर्थन देगी। वित्त मंत्री ने नारियल उत्पादन बढ़ाने के लिए एक नारियल प्रमोशन स्कीम का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में गैर-उत्पादक पेड़ों की जगह नई और बेहतर किस्मों के पौधे लगाए जाएंगे।
इसके अलावा, सरकार काजू और कोकोआ की खेती व प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है, ताकि भारत इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन सके।
इस पहल का लक्ष्य निर्यात में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और वर्ष 2030 तक भारतीय काजू व कोकोआ को एक प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। इसमें वैल्यू एडिशन और ब्रांडिंग को मजबूत करने पर खास जोर दिया जाएगा।
साथ ही, चंदन जैसी सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसल के संरक्षण और विकास के लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर इसके पूरे इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करने का प्रयास करेगी।
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि देशभर में 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त भारतीय क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का एक नेटवर्क बनाया जाएगा। इसके साथ ही, पशुपालक किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, ये सभी कदम कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के समग्र विकास को गति देने की दिशा में सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।