बिहार के किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में फार्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए एग्री स्टैक अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत किसानों को एक यूनिक डिजिटल पहचान दी जा रही है, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के प्राप्त कर सकें।
सरकार का लक्ष्य है कि अगले एक महीने में लगभग 75 लाख किसानों को फार्मर आईडी जारी कर दी जाए, जिससे वे पीएम किसान योजना के अंतर्गत हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकें।
हालांकि, फार्मर आईडी बनवाने के दौरान कई किसानों को जमीन से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ियों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अपने सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परिमार्जन प्लस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आए किसान कार्ड आवेदनों में मौजूद भूमि रिकॉर्ड की त्रुटियों को तुरंत ठीक किया जाए।
राजस्व विभाग के सचिव जय सिंह ने जानकारी दी कि किसानों के भूमि रिकॉर्ड को कृषि विभाग के डाटाबेस से जोड़ने के लिए दोनों विभाग आपसी समन्वय से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सर्कल अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दें, ताकि परिमार्जन प्लस के माध्यम से आए ऐसे सभी मामलों का शीघ्र समाधान हो सके, जिनमें भूमि रिकॉर्ड से संबंधित गलतियां हैं।
सरकार का मानना है कि जब तक जमीन के रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होंगे, तब तक फार्मर आईडी और एग्री स्टैक के तहत पंजीकरण संभव नहीं हो पाएगा।
सूत्रों के अनुसार यह आदेश बड़ी संख्या में किसानों की शिकायतें मिलने के बाद जारी किया गया। कई किसानों के आवेदन सिर्फ इसलिए अस्वीकृत हो गए थे क्योंकि उनके डिजिटाइज्ड जमाबंदी और अन्य भूमि दस्तावेजों में त्रुटियां थीं।
कई मामलों में किसानों का नाम भूमि रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था, कहीं पिता के नाम में अंतर था, तो कहीं जमीन के रकबे या खसरा विवरण में गलतियां पाई गईं। कुछ रिकॉर्ड में गंभीर तकनीकी त्रुटियों के कारण एग्री स्टैक के तहत किसान रजिस्टर में पंजीकरण संभव नहीं हो पा रहा था।
एक वरिष्ठ कृषि अधिकारी ने बताया कि बड़ी संख्या में किसानों ने किसान रजिस्टर में ऑनलाइन आवेदन किया है, लेकिन भूमि रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसी वजह से फार्मर आईडी को जमीन से जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस विषय में राजस्व विभाग को पहले ही अवगत करा दिया गया है और अब ऐसे सभी मामलों का तेजी से निपटारा किया जा रहा है।
राज्य कृषि विभाग के मुताबिक अब तक लगभग 20 लाख किसानों को फार्मर आईडी जारी की जा चुकी है। इसके अलावा 4.5 लाख से अधिक किसानों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें उनका नाम, पता, भूमि विवरण और अन्य आवश्यक जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की गई है।
कृषि विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को एग्री स्टैक कार्यक्रम से जोड़ा जा सके। इस पहल का उद्देश्य किसानों को एक डिजिटल पहचान प्रदान करना है, जिससे वे बिना ज्यादा भागदौड़ के विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि भविष्य में पीएम किसान योजना की राशि केवल पंजीकृत फार्मर आईडी के माध्यम से ही दी जाएगी। ऐसे में एग्री स्टैक के तहत पंजीकरण कराना किसानों के लिए अनिवार्य होता जा रहा है।
राजस्व विभाग के सचिव ने भरोसा दिलाया है कि तय समय सीमा के भीतर पीएम किसान योजना के सभी पात्र किसानों को फार्मर आईडी से जोड़ दिया जाएगा। कृषि अधिकारियों के अनुसार बिहार में लगभग दो करोड़ किसानों को चरणबद्ध तरीके से एग्री स्टैक कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल किया जाना है।
सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी किसान को तकनीकी कारणों से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहना पड़े और सभी को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
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