मिनी नंदिनी योजना: डेयरी व्यवसाय के लिए सुनहरा अवसर

By : Tractorbird Published on : 03-Jul-2026
/

जानें, मिनी नंदिनी योजना की पूरी जानकारी

उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा देसी नस्ल की गायों के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत मिनी नंदिनी योजना शुरू की है। यह योजना उन किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पूंजी की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। 

सरकार इस योजना के तहत 10 देसी गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए कुल परियोजना लागत का 50 प्रतिशत, यानी अधिकतम 11.80 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान कर रही है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पात्र किसान एवं पशुपालक 21 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करना तथा किसानों को स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराना है।

10 देसी गायों की डेयरी यूनिट पर मिलेगा बड़ा आर्थिक सहयोग

मिनी नंदिनी योजना के अंतर्गत 10 देसी गायों की डेयरी यूनिट की कुल परियोजना लागत 23.60 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें सरकार 50 प्रतिशत तक यानी 11.80 लाख रुपये की सब्सिडी देगी। शेष राशि में से लगभग 35 प्रतिशत तक बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि लाभार्थी को कम से कम 15 प्रतिशत राशि स्वयं निवेश करनी होगी। 

इस वित्तीय व्यवस्था से किसानों पर शुरुआती निवेश का बोझ काफी कम हो जाएगा और वे आसानी से आधुनिक डेयरी यूनिट स्थापित कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि डेयरी व्यवसाय किसानों के लिए नियमित नकद आय का मजबूत माध्यम बन सकता है, जिससे खेती पर उनकी निर्भरता कम होगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

केवल इन देसी नस्ल की गायों को मिलेगा योजना का लाभ

योजना के तहत केवल भारतीय देसी नस्ल की गायों को ही शामिल किया गया है। इनमें मुख्य रूप से साहीवाल, गीर और थारपारकर नस्ल की गायें शामिल हैं। इन नस्लों को बेहतर दूध उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और भारतीय जलवायु के अनुकूल माना जाता है। सरकार का उद्देश्य इन उत्कृष्ट देसी नस्लों का संरक्षण और संवर्धन करना है ताकि भविष्य में दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ जैव विविधता भी सुरक्षित रह सके। 

योजना के अनुसार खरीदी जाने वाली प्रत्येक गाय पहली या दूसरी बार बछड़ा दे चुकी होनी चाहिए तथा उसे बछड़ा दिए हुए 45 दिन से अधिक समय नहीं हुआ होना चाहिए। इसके अलावा सभी गायों का ईयर टैग लगवाना और बीमा कराना अनिवार्य रहेगा, जिससे पशुओं की पहचान, सुरक्षा और नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जा सके।

पूरे उत्तर प्रदेश में लागू योजना, महिलाओं को विशेष प्राथमिकता

मिनी नंदिनी योजना उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू की गई है। पशुपालन विभाग के अनुसार इस योजना का उद्देश्य केवल डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसी कारण योजना के कुल लाभार्थियों में 50 प्रतिशत लाभ महिलाओं के लिए आरक्षित रखा गया है। 

इससे स्वयं सहायता समूहों, महिला किसानों और महिला पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय में आगे आने का अवसर मिलेगा। ग्रामीण परिवारों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से परिवार की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। सरकार का मानना है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से डेयरी क्षेत्र अधिक संगठित और सफल बन सकता है।

आवेदन के लिए पात्रता और आवश्यक शर्तें

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक को कुछ निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा। सबसे पहले, आवेदक के पास गाय या भैंस पालन का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए, जिसका सत्यापन संबंधित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए कम से कम 0.20 एकड़ भूमि उपलब्ध होना आवश्यक है। 

हरे चारे की व्यवस्था के लिए 0.80 एकड़ भूमि होनी चाहिए, जो स्वयं की, पैतृक अथवा कम से कम सात वर्ष की पंजीकृत लीज पर ली गई हो सकती है। भूमि ऐसी होनी चाहिए जहां जलभराव की समस्या न हो तथा 10 गायों के रखरखाव के लिए पर्याप्त स्थान, शेड और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। इन सभी शर्तों का पालन करने के बाद ही आवेदन स्वीकृति के लिए विचार किया जाएगा।

किन लोगों को नहीं मिलेगा योजना का लाभ और आवेदन प्रक्रिया

पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने पहले से कामधेनु योजना, मिनी या माइक्रो कामधेनु योजना, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ प्राप्त किया है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। इच्छुक किसान और पशुपालक 21 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन नंद बाबा दुग्ध मिशन के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। 

जिन क्षेत्रों में ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह संचालित नहीं हुआ है, वहां आवेदक अपने जिले के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) या मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में जाकर अथवा पंजीकृत डाक के माध्यम से आवेदन जमा कर सकते हैं। यदि निर्धारित संख्या से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पात्र लाभार्थियों का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।

दो चरणों में मिलेगी सब्सिडी, किसानों के लिए आय बढ़ाने का बेहतर अवसर

मिनी नंदिनी योजना के तहत स्वीकृत अनुदान राशि लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाएगी। सब्सिडी दो चरणों में जारी की जाएगी। पहले चरण में डेयरी शेड और अन्य आवश्यक आधारभूत ढांचे के निर्माण के बाद कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके बाद निर्धारित मानकों के अनुसार 10 देसी गायों की खरीद पूरी होने पर शेष 25 प्रतिशत सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में भेज दी जाएगी। 

यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है, कि योजना का लाभ वास्तविक डेयरी इकाइयों तक पहुंचे और धन का सही उपयोग हो। कुल मिलाकर मिनी नंदिनी योजना किसानों और पशुपालकों के लिए डेयरी व्यवसाय शुरू करने का एक बड़ा अवसर है। सरकारी अनुदान, बैंक ऋण की सुविधा, देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा और महिलाओं को प्राथमिकता जैसी विशेषताओं के कारण यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

Tractorbird प्लैटफॉर्म आपको खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता रहता है। इसके माध्यम से ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी विशेषताएँ और खेतों में उनके उपयोग से संबंधित अपडेट नियमित रूप से साझा किए जाते हैं। साथ ही स्वराज, महिंद्रा, न्यूहॉलैंड, मैसी फर्ग्यूसन और कुबोटा जैसी प्रमुख कंपनियों के ट्रैक्टरों की पूरी जानकारी भी यहां प्राप्त होती है।

Join TractorBird Whatsapp Group

Categories

Similar Posts