उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। निजी नलकूपों के लिए बिजली कनेक्शन लेने में आने वाली दिक्कतों और अनावश्यक देरी को खत्म करने के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों किसानों को निजी नलकूपों का बिजली कनेक्शन हासिल करने में सुविधा मिलेगी।
अब कनेक्शन प्रक्रिया के दौरान जरूरी निर्माण सामग्री जुटाने के लिए किसानों को बार-बार बिजली भंडार केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पावर कॉरपोरेशन ने निजी नलकूप विद्युत कनेक्शन की प्रक्रिया को अधिक उपभोक्ता हितैषी, पारदर्शी और सरल बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश प्रदेश के सभी वितरण निगमों को दिए गए हैं।
यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने इस संबंध में प्रदेश के सभी वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि निजी नलकूपों के बिजली कनेक्शन की पूरी प्रक्रिया को किसानों के लिए आसान और पारदर्शी बनाया जाए। निगम की जानकारी में आया था कि कनेक्शन के लिए जरूरी कुछ निर्माण सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
कई मामलों में सामग्री की अनुपलब्धता के चलते विद्युत कनेक्शन का काम भी प्रभावित हो रहा था। इससे किसानों को कनेक्शन मिलने में देरी होती थी और उन्हें संबंधित कार्यालयों व भंडार केंद्रों के कई बार चक्कर लगाने पड़ते थे। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य इसी समस्या को दूर करना है।
यूपीपीसीएल ने किसानों की परेशानी दूर करने के लिए दो अहम फैसले लिए हैं। पहले निर्णय के तहत निजी नलकूप कनेक्शन के लिए जरूरी निर्माण सामग्री की किट यथासंभव एकमुश्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे किसानों को अलग-अलग सामग्री लेने के लिए बार-बार भंडार केंद्रों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
निर्माण सामग्री समय पर मिलने से कनेक्शन के काम में होने वाली अनावश्यक देरी भी कम होगी। निजी नलकूप विद्युत संयोजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में क्रॉस आर्म होल्डिंग क्लैम्प, स्टे क्लैम्प, एफ-ब्रैकेट, 11 केवी टीपीएमओ सेट, 11 केवी थ्री-फेज फ्यूज सेट, टॉप टी-ऑफ क्लैम्प, एमएस नट-बोल्ट और वॉशर समेत कई अन्य वस्तुएं शामिल हैं।
दूसरे महत्वपूर्ण फैसले के तहत उन विकेन्द्रीकृत निर्माण सामग्रियों का मूल्य किसानों से धन-मांग पत्र यानी टीसी के माध्यम से नहीं लिया जाएगा, जिनकी आपूर्ति स्वयं निगम की ओर से नहीं की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत निजी नलकूप कनेक्शन के लिए तैयार किए जाने वाले स्टीमेट में संबंधित निर्माण सामग्रियों का विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा।
हालांकि, इन सामग्रियों की कीमत को स्टीमेट में शामिल नहीं किया जाएगा। किसानों की सुविधा और पारदर्शिता के लिए सामग्री की आवश्यक मात्रा और उसकी अनुमानित लागत का उल्लेख जरूर किया जाएगा। इससे आवेदक को पहले से पता रहेगा कि कनेक्शन के लिए किस सामग्री की कितनी जरूरत होगी और उस पर संभावित खर्च कितना आ सकता है।
नई व्यवस्था में किसानों को एक और विकल्प दिया गया है। यदि आवेदक को जरूरत महसूस होती है तो वह संबंधित निर्माण सामग्री की व्यवस्था अपने खर्च पर अधिकृत लाइन निर्माण एजेंसी के माध्यम से करा सकता है। हालांकि, बिजली कनेक्शन को ऊर्जीकृत करने से पहले इन सामग्रियों की गुणवत्ता और तकनीकी विशिष्टताओं की जांच विभागीय मानकों के अनुसार की जाएगी।
यानी किसान अपनी सुविधा के अनुसार सामग्री की व्यवस्था तो कर सकेंगे, लेकिन विद्युत कनेक्शन शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस्तेमाल की गई सामग्री निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर खरी उतरती हो। इससे एक ओर किसानों को सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर विद्युत व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।
यूपीपीसीएल चेयरमैन ने लाइन निर्माण से जुड़े कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि पोल लगाने, स्टे लगाने, ग्राउटिंग और अन्य सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही कराए जाएं। निजी नलकूप कनेक्शन के आवेदकों को जारी किए जाने वाले धन-मांग पत्र यानी टीसी के साथ नियम और शर्तें भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
इससे किसानों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी स्पष्ट रूप से मिल सकेगी और कनेक्शन लेने के दौरान किसी तरह की अस्पष्टता नहीं रहेगी। विभाग का मानना है कि नियमों और शर्तों को स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को निजी नलकूप बिजली कनेक्शन के लिए होने वाली अनावश्यक भागदौड़ और देरी से राहत दिलाना है। इसके साथ ही निजी नलकूपों के विद्युतीकरण की प्रक्रिया को तेज करना, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और विद्युत संयोजन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं सुगम बनाना भी इस पहल के प्रमुख लक्ष्य हैं।
माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से किसानों को नलकूप कनेक्शन मिलने में आसानी होगी और सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी। इससे प्रदेश की कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ खेती की उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। यूपीपीसीएल का यह कदम किसानों के लिए राहत देने वाला साबित होने के साथ-साथ प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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