रबी फसलों की बुवाई 306 लाख हेक्टेयर के पार, दलहन–तिलहन में उल्लेखनीय वृद्धि

By : Tractorbird Published on : 28-Nov-2025
रबी

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 21 नवंबर 2025 तक जारी रबी फसलों के क्षेत्र कवरेज के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष देशभर में बुवाई कार्य तेज़ गति से प्रगति कर रहा है। 

कुल रबी फसल क्षेत्र कवरेज 306.31 लाख हेक्टेयर तक पहुँच चुका है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 272.78 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार रबी सीजन 2025-26 में 33.53 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

इन आँकड़ों से यह स्पष्ट है कि किसानों में इस वर्ष रबी फसलों के प्रति अधिक रुचि और उत्साह देखने को मिल रहा है। अनुकूल मौसम, बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), बेहतर बीज उपलब्धता और सरकारी योजनाओं के प्रभाव से बुवाई में तेजी आई है।

गेहूँ और चावल की बुवाई में निरंतर बढ़ोतरी

रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूँ में इस वर्ष काफी तेजी दर्ज की गई है। गेहूँ का सामान्य क्षेत्रफल 312.35 लाख हेक्टेयर है, जबकि 21 नवंबर 2025 तक 128.37 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। 

पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 107.09 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार गेहूँ के अंतर्गत क्षेत्र में 21.27 लाख हेक्टेयर की महत्वपूर्ण वृद्धि देखने को मिली है।

यह वृद्धि बेहतर उत्पादकता वाले बीज, समय पर हुई बुवाई तथा पर्याप्त नमी उपलब्ध होने जैसे कारकों का परिणाम है।

इसी प्रकार रबी चावल की बुवाई भी बेहतर रही है। इस वर्ष 8.26 लाख हेक्टेयर में रबी चावल का रोपण हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.67 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि किसान रबी मौसम में भी चावल उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं।

दलहन क्षेत्र में बढ़ी किसानों की भागीदारी

दलहनों के तहत क्षेत्र कवरेज में इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुल दलहन बुवाई 73.36 लाख हेक्टेयर पहुँच चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 68.15 लाख हेक्टेयर थी। इस प्रकार दलहनों में 5.21 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है।

दलहनों की मुख्य फसलों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:

1. चना (ग्राम)

बुवाई: 53.71 लाख हेक्टेयर

पिछले वर्ष: 49.30 लाख हेक्टेयर

वृद्धि: 4.41 लाख हेक्टेयर

देश में चना सबसे अधिक बोया जाने वाला दलहन है। MSP में हुई बढ़ोतरी और चना दाल की मांग बढ़ने से इसके क्षेत्र में निरंतर वृद्धि हो रही है।

2. मसूर (लेंटिल)

इस वर्ष: 9.01 लाख हेक्टेयर

पिछले वर्ष: 8.57 लाख हेक्टेयर

वृद्धि: 0.44 लाख हेक्टेयर

3. खेत मटर

इस वर्ष: 5.58 लाख हेक्टेयर(2025-26)

वृद्धि: 0.78 लाख हेक्टेयर

4. कुलथी

1.11 लाख हेक्टेयर (2025-26)

वृद्धि: 0.08 लाख हेक्टेयर

5. उड़द, मूंग और अन्य दालें

उड़द, मूंग, लैथाइरस और अन्य दालों में मामूली गिरावट देखने को मिली है। विशेष रूप से अल्प अवधि वाली दलहनों में मौसम का उतार-चढ़ाव प्रभाव डालता है, जिससे क्षेत्रफल घटता बढ़ता रहता है।

श्री अन्न एवं मोटे अनाजों में 2.44 लाख हेक्टेयर की वृद्धि

प्रधानमंत्री श्री अन्न अभियान के तहत मोटे अनाजों (मिलेट्स) में किसानों की रुचि बढ़ रही है। इस वर्ष इनका कुल क्षेत्रफल 19.69 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष 17.26 लाख हेक्टेयर था। अर्थात् इस श्रेणी में 2.44 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।

मुख्य मोटे अनाज की स्थिति:

  • ज्वार: 8.99 लाख हेक्टेयर (0.56 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
  • रागी: 0.49 लाख हेक्टेयर (0.11 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
  • मक्का: 6.57 लाख हेक्टेयर (1.19 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
  •  जौ: 3.50 लाख हेक्टेयर (0.50 लाख हेक्टेयर वृद्धि)

छोटे बाजरा और बाजरे में भी थोड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। मिलेट्स की बढ़ती मांग और पोषण के प्रति जागरूकता इसका प्रमुख कारण है।

तिलहनों में 76.64 लाख हेक्टेयर की बुवाई, सरसों सबसे आगे

तिलहन फसलों में इस वर्ष कुल 76.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.94 लाख हेक्टेयर अधिक है।

सरसों–रेपसीड

सबसे अधिक बढ़ोतरी रेपसीड और सरसों में देखने को मिली है।

  • इस वर्ष: 73.80 लाख हेक्टेयर 
  • पिछले वर्ष: 69.58 लाख हेक्टेयर
  • वृद्धि: 4.22 लाख हेक्टेयर

यह वृद्धि सरसों के आकर्षक MSP, बेहतर पैदावार और कम लागत में अच्छी आय उपलब्ध होने के कारण है।

अन्य तिलहनों की स्थिति:

  • कुसुम: 0.46 लाख हेक्टेयर (0.24 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
  • सूरजमुखी: 0.16 लाख हेक्टेयर (0.04 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
  • मूंगफली, अलसी और अन्य तेलबीज में कुछ कमी दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर रबी सीजन की प्रगति उत्साहजनक

सभी श्रेणियों—गेहूँ, चावल, दलहन, मोटे अनाज और तिलहन—में इस वर्ष बुवाई अत्यंत सकारात्मक रही है।

कुल रबी बुवाई 306.31 लाख हेक्टेयर पहुँचने के साथ रबी सीजन 2025-26 पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है।

सरकार की योजनाओं, जल प्रबंधन में सुधार, गुणवत्तापूर्ण बीज तथा अनुकूल मौसम ने इस प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि मौसमी परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं, तो इस वर्ष रबी फसलों का उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकता है।

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