किसान हल्दी की खेती से कम लागत में अच्छा मुनाफा कैसे कमा सकते हैं ?

By : Tractorbird News Published on : 01-Apr-2024
किसान

हल्दी एक ऐसी फसल है, जिसमें बहुत सारे औषधीय गुण विघमान हैं। यदि आप हल्दी की खेती करेंगे तो आपको इससे बंपर मुनाफा हांसिल हो सकता है। कृषि हो अथवा व्यवसाय जिस चीज की बाजार में अत्यधिक मांग रहती है उसी से लाभ भी होता है। 

ऐसे में यदि आप हल्दी की खेती (Turmeric Farming) करते हैं, तो आप इससे तगड़ा मुनाफा अर्जित कर सकते हैं। किसान भाई हल्दी की खेती के साथ इसका व्यवसाय शुरू करते हैं तो आप और अधिक मुनाफा बढ़ा सकते है

हल्दी में बहुत सारे औषधीय गुण विघमान होते हैं, ऐसे में अगर आप हल्दी की खेती करेंगे तो आपको मोटा मुनाफा होगा।

भारत में हल्दी का कितना उत्पादन होता है ?

भारत विश्व में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। आईसीएआर की रिपोर्ट की मानें तो विश्व में कुल हल्दी उत्पादन का 75% भाग भारत के तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों में उगाया जाता है। 

तेलंगाना देश का सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक राज्य है। विश्व में 'येलोसिटी' या 'हल्दी नगर' के नाम से विख्यात इरोड (तमिलनाडु) और सांगली (महाराष्ट्र) हल्दी के सबसे बड़े उत्पादक और सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र हैं। 

ये भी पढ़ें : हल्दी की खेती कैसे की जाती है जानिए सम्पूर्ण जानकारी के बारे में

हल्दी की खेती करने की क्या विधि है ?

हल्दी एक उष्ण और आर्द्र जलवायु का पौधा है। पौधों के बेहतरीन विकास के लिए 1500 से 2250 मिमी वर्षा और 20-30 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक है। 

हल्दी की शानदार पैदावार के लिए जल निकासी वाली दोमट जलोढ़, लटेराइट मृदा उपयुक्त होती है। खेती से पूर्व मिट्टी-पलट हल से जुताई कर बेहतर ढ़ंग से भुरभुरी बनाना आवश्यक है।

हल्दी की बुवाई का समय क्या है ?

उत्तर भारत में अप्रैल के बीच से जुलाई के बीच तक जबकि दक्षिण भारत में फरवरी-अप्रैल में इसकी खेती प्रारंभ हो जाती है। 

क्यारियों में पौधों के मध्य 25 सेमी का फासला रखते हुए 25-30 सेमी आकार के गड्ढों को बेहतर तरीके से सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्सोप्स्ट भरकर कंदों को रखा जाता है और फिर मिट्टी से ढक दिया जाता है।

एक हेक्टेयर में हल्दी की रोपाई के लिए तकरीबन 2.5 टन ताजा प्रकंदों की आवश्यकता होती है। 

हल्दी की विभिन्न किस्में

भारत में हल्दी की 30 से ज्यादा किस्मों की खेती की जाती हैं। यह देश के 20 से ज्यादा राज्यों में उगाई जाती है। 

केरल में एलेप्पीफिंगर, महाराष्ट्र में राजापुर, करहडी, वैगोन, आंध्र प्रदेश में निजामाबाद, आर्मूर, वोंटीमिट्टा, तमिनाडु में इरोड लोकल, बीएसआर-1, पीटीएस-10, पश्चिम बंगाल और असम में पट्टान्त, मेघायल में लकडोंग, लहशीन, लड़वा, लकशैन, मेघ-1, मिजोरम में लकडोंग, आरटी-1 जबकि मणिपुर और सिक्किम में लकडोंग और स्थानीय किस्म हैं। 

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